भारतीय पौराणिक कथाएं भाग – १

indian Mythology

Indian mythology tales (भारतीय पौराणिक कथाएं )

भारतीय में बहुत सी पौराणिक(mythology) कथाएं है जो पीढ़ी से पीढ़ी हमें सुनाई जा रही है या संग्रहीत शास्त्रों के माध्यम से हम पढ़कर समझ रहे है। ये हमारी भारतीय संस्कृति की अमुल्य धरोवर है। भारतीय पौराणिक (Indian mythology) कथाएं की शृंखला में हम आपको उन कथाओ के बारे में बताएँगे जिन को आप भी अपनी आने वाली पीढ़ीयो को बता सके और हमारी ये अमुल्य धरोवर आगे की पीढ़ी में जा सके।

यम और यमी (yama and yami)

ऋग्वेद के अनुसार यम और यमी जुड़वाँ बच्चे थे। उनके पिता का नाम विवास्वंत (Vivasvant) और माँ का नाम सरान्यु (Saranyu) था। वेदों के अनुसार यम को धरती का पहला पुरुष और यमी को धरती की पहली महिला माना जाता हैं (According to Rig Veda yama and yami was the first male and female on earth and Yama was considered to have been the first mortal who died on earth) । यम और यमी से बहुत से कथाएं जुडी है जैसे दिन और रात का बनाना, यमुना का आना, मृत्यु के देवता यमराज का जन्म।

यमी ने यम को से प्रेम हो जाता है और वो यम को एक संतान पैदा करने को बोलती है। उस समय धरती पर उनके अलावा कोई और स्त्री या पुरुष नहीं था और यमी ने ये सब मानव जाति को आगे बढाने के लिए किया किन्तु यम माना कर देते है और बोलते हैं हम भाई -बहन है और धर्म के अनुसार ये सही नहीं है। इस प्रकार यम निसंतान ही मर जाते है। उनके मरने के बाद यमी उनके शोक में रोना शुरू कर देती हैं काफी दिनों तक रोने के कारण यमी के आँसुओ से धरती पर बाढ़ आ जाती है। जब भगवान यमी को समझते है कि वो अपना विलाप समाप्त कर दे तो यमी बोलती है कि आज उसके भाई की मौत का दिन है तो वो शोक व्यक्त क्यों नहीं कर सकती है। इसके पीछे वजह यह थी कि जब तक दिन और रात नहीं बने थे फिर भगवान ने रात बनाई जिस से यमी को ये समझाया गया कि उसके भाई की मृत्यु आज नहीं कल हुई थी इस प्रकार दिन और रात का होना और आज कल का बनाना आरंभ हुआ था। धीरे-धीरे यमी का शोक कम हुआ और उसके आँसुओ से निकलने वाले पानी से यमुना नदी जन्म हुआ।

यम की मृत्यु के समय उनकी कोई सन्तान नहीं थी तो वो पितृलोक में ही रह गए ऐसा इसलिए हुआ, कहा जाता है की मृत्यु के बाद आत्मा पितृलोक में जाती है और वह उनके जीवन का लेखा-जोखा चित्रगुप्त द्वारा देखा जाता है और उनका स्वर्गलोक या नरकलोक में जाना या ये कहे उसका अगला जन्म तय होता है। अपनों की मृत्यु के बाद सन्तान द्वारा जो श्राद्ध किया जाता है वही आत्मा को पितृलोक से आगे जाने के लिए किया जाता है। इसलिए हिन्दू धर्म में संतान का बहुत महत्व है। यम निसंतान थे तो वो सदा के लिए वही रह गए और वो वहा जाने वाले पहले मनुष्य थे तो उनको वह का स्वामी अर्थात मृत्युलोक के भगवान बना दिया गया।

कलयुग की हकीकत

पाण्डवो का अज्ञातवाश समाप्त होने मे कुछ समय पहले पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छूपने का स्थान ढूढं रहे थे. शनिदेव की नजर पाण्डवों पर पडी शनिदेव के मन मे विचार आया, इन सब मे बुधिमान कौन है परिक्षा ली जाय।
शनिदेव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी मे उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिन।
अचानक भीम ने महल को देखा और वो आकर्षित हो गया, भीम, यधिष्ठिर से बोला-भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ ।
भीम महल के द्वार पर पहुँचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप मे खड़े थे, Continue reading