नर्मदा- एक नदी जो पवित्र गंगा को शुद्ध करती है।(Narmada- a river that purifies holy Ganges)

narmada river

ऐसी मान्यता है कि हम इंसानो को आपने पाप धोने है और अपने को शुद्ध करना है तो गंगा में स्नान करना चाहिए। और इसके साथ एक और मान्यता है कि साल में एक बार मई-जून के मध्य में गंगा स्वयं की शुद्धि के लिए काली गाय का रूप लेकर नर्मदा नदी के पवित्र जल में स्नान करने के लिए आती हैं। इस धारणा के अनुसार नर्मदा (Narmada) पवित्र गंगा जो की नदियों में श्रेष्ठ है को भी शुद्ध करती है।

नर्मदा की बात करें तो ये गंगा से भी प्रचीन नदी है जो मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में बहती है। मैकाल पर्वत के अमरकंटक शिखर जो की मध्य प्रदेश के अनुपपुर जिले में विंध्य और सतपुड़ा पहाड़ों में है के पास एक गोमुख से निकलती है और तेरह सौ किलोमिटर का सफर तय करके भडूच (भरुच)के पास खम्भात की खाड़ी में अरब सागर से जा कर मिलती है। नर्मदा नदी को ही उत्तरी और दक्षिणी भारत की सीमारेखा माना जाता है।

एक और आश्चर्य जनक बात यह है कि सभी नदियाँ एक ही दिशा में बहती है पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर परन्तु नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती है। नर्मदा नदी के अनेको नाम है जैसे, नर्मदा, त्रिकूटा, दक्षिनगंगा, सुरसा, कृपा, मन्दाकिनी ,रेवा, विपापा, करभा, रज्जन,वायुवाहिनी, बालुवाहिनी, विमला आदि। नर्मदा, समूचे विश्व मे दिव्य व रहस्यमयी नदी है। इसकी महिमा का वर्णन चारों वेदों की व्याख्या में श्री विष्णु के अवतार वेदव्यास जी ने स्कन्द पुराण के रेवाखंड़ में किया है।

धार्मिक ग्रंथों में केवल एक ही नदी ऐसी है जिसकी परिक्रमा के बारे में चर्चा की गई है। अमरकंटक से लेकर खंभात की खाड़ी तक इसकी परिक्रमा की जाती है। नर्मदा नदी की परिक्रमा पैदल 3 वर्ष 3 माह और तेरह दिनों में पूर्ण होती है। इस परिक्रमा में बहुत से दिव्य तीर्थ जैसे, ज्योतिर्लिंग, रेवा कुंड, श्री हनुमंतेश्वर तीर्थ, शूलपाणी झाड़ी, श्री शूलभेद तीर्थ, श्री नंदिकेश्वर तीर्थ, भृगु ऋषि का आश्रम भृगुकच्छ, आदि है।

इतनी दिव्य नदी होने के बावजूद आज हम इंसानो ने इसको प्रदूषित कर दिया है। सरकारों का भी इस और ख़ास ध्यान नहीं है। बताया जाता है की इस के चलते करीब 28 जलीय प्रजातियों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। नर्मदा किनारे बसे करीब  50 नगरों का दूषित पानी नर्मदा नदी में मिलता है। नदी के दोनों तटों का पर्यटन के माध्यम से और परिक्रमावासियों के लिए व्यावसायिकरण हो रहा है उसका भी नदी को प्रदूषित करने में बड़ा हाथ  है। यही हाल आज गंगा, जमुना, यमुना और भारत में बहने वाली ज्यादातर नदियों का है। नदियों का देश कहा जाने वाला भारत आज अपनी ही नदियों को बर्बाद करने में लगा है और किसी का भी इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं है।

 

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